#Himachal Pradesh #Shimla

राज्य सरकार 100 से कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों में शुरू करेगी प्रोफेशनल कोर्स : शिक्षा मंत्री

हिमाचल प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों की घटती संख्या के बावजूद किसी भी सरकारी डिग्री कॉलेज को बंद या मर्ज न करने का फैसला लिया है। मंगलवार को शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में हुई विभागीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। अब सरकार इन कॉलेजों को सशक्त बनाने के लिए प्रोफेशनल और रोजगारोन्मुखी कोर्स शुरू करने की दिशा में कदम उठाएगी।

फरवरी 2025 में शिक्षा विभाग ने राज्य के 16 सरकारी डिग्री कॉलेजों को मर्ज करने का प्रस्ताव तैयार किया था। इनमें वे कॉलेज शामिल थे जहां विद्यार्थियों की संख्या 100 से कम रह गई थी। इन्हें नजदीकी बड़े कॉलेजों में मिलाने की योजना थी, लेकिन अब सरकार ने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी कॉलेज को न तो बंद किया जाएगा और न ही मर्ज।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि कॉलेजों को आत्मनिर्भर और उपयोगी बनाने के लिए उनमें चार वर्षीय बीएड, बीबीए, बीसीए, पर्यटन प्रबंधन, फार्मा, एग्रीकल्चर साइंस, आईटी और हेल्थ सेक्टर से जुड़े नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि 2026 के शैक्षणिक सत्र से पहले प्रस्ताव तैयार कर राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाए।

बैठक में यह भी माना गया कि पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों के छोटे कॉलेज स्थानीय युवाओं, खासकर लड़कियों की उच्च शिक्षा का मुख्य केंद्र हैं। इन्हें मर्ज करने से शिक्षा के अवसर सीमित हो सकते हैं। इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि इन कॉलेजों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार कोर्स शुरू कर उन्हें पुनर्जीवित किया जाएगा।

इसके साथ ही, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शिक्षकों की नियुक्ति, इन्फ्रास्ट्रक्चर अपग्रेडेशन और डिजिटल शिक्षण साधनों को बढ़ावा देने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।

बैठक में स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान स्कूल प्रिंसिपलों की पदोन्नति प्रक्रिया और 26 नवंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र की तैयारियों पर भी चर्चा हुई।

इन कॉलेजों को मर्ज करने का था प्रस्ताव:
भलेई (49 विद्यार्थी), कुपवी (43), कुकुमसेरी (38), टिक्कर (15), शिवनगर (97), चिंतपूर्णी (96), रोनहाट (95), हरिपुर गुलेर (90), रामशहर (88), कोटली (85), पझोता (82), ननखड़ी (81), सुग भटोली (79), थाची (74), संधोल (67) और जयनगर (67)।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *