ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे पश्मी मंदिर में विराजे छत्रधारी चालदा महासू महाराज
जिला सिरमौर के शिलाई क्षेत्र के लोगों की सदियों पुरानी मन्नत आखिरकार पूरी हो गई है। उत्तराखंड से छत्रधारी चालदा महासू महाराज पहली बार हिमाचल प्रदेश की पावन धरा पर पधारे और पश्मी मंदिर में विधिवत रूप से विराजमान हो गए। यह एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि इससे पहले कहीं भी यह उल्लेख नहीं मिलता कि चालदा महासू महाराज कभी हिमाचल आए हों।
उत्तराखंड के दसऊ से 8 दिसंबर को प्रस्थान करने के बाद पांच दिनों की यात्रा पूरी कर 13 दिसंबर को महाराज ने हिमाचल की सीमा विनाश में प्रवेश किया। यहां उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, नाहन विधायक अजय बहादुर अजय सोलंकी सहित हजारों श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। उसी दिन महाराज का पहला पड़ाव द्राविल रहा।
रविवार को दोपहर की पूजा के बाद द्राविल से पश्मी के लिए प्रस्थान किया गया और 15 दिसंबर को ब्रह्म मुहूर्त में ठीक सुबह 4 बजे चालदा महासू महाराज पश्मी मंदिर में विराजमान हुए। इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कोविड काल के दौरान चालदा महाराज का देव चिन्ह माने जाने वाला घाडुवा बकरा पश्मी पहुंचा था। उसी समय देवता के गुर ने भविष्यवाणी की थी कि चालदा महासू महाराज का अगला पड़ाव पश्मी होगा। इसके बाद गांववासियों ने तपस्या और मंदिर निर्माण की तैयारी शुरू की, जिसे गत वर्ष से और गति मिली।
करीब डेढ़ वर्ष में भव्य मंदिर का निर्माण पूर्ण हुआ। मंदिर के पुजारी राजेन्द्र सिंह नौटियाल ने बताया कि छत्रधारी चालदा महासू महाराज एक वर्ष तक पश्मी में विराजमान रहेंगे, इसके बाद उत्तराखंड के मशक जाएंगे। उन्होंने बताया कि मशक में भी महाराज का मंदिर बनकर तैयार है और एक वर्ष बाद वहीं विराजमान होंगे।
रविवार को द्राविल से प्रस्थान के बाद शिलाई मुख्य बाजार में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान सहित हजारों लोगों ने महाराज का स्वागत किया, जबकि सोमवार तड़के 4 बजे पश्मी मंदिर में विधिवत स्थापना संपन्न हुई।





