राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना से युवाओं को मिल रहा नया भविष्य, ई-टैक्सी पर 50% सब्सिडी से बढ़ी आत्मनिर्भरता की राह
शिमला
हिमाचल प्रदेश सरकार की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना प्रदेश के युवाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई दिशा दे रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सरकार पात्र युवाओं को ई-टैक्सी खरीदने पर 50 प्रतिशत उपदान (सब्सिडी) प्रदान कर रही है। साथ ही इन टैक्सियों को सरकारी विभागों से संबद्ध किया जा रहा है, जिससे युवाओं को हर माह 50 से 60 हजार रुपये तक की आय सुनिश्चित हो रही है।
योजना का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनमें स्वरोजगार की भावना को बढ़ावा देना है। सरकार की इस पहल से प्रदेश में न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक कदम उठाया गया है।
योजना के अंतर्गत ई-टैक्सी की कुल कीमत में से 50 प्रतिशत राशि सरकार उपदान के रूप में देती है, जबकि 40 प्रतिशत बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध होता है और 10 प्रतिशत योगदान लाभार्थी को स्वयं देना होता है।
गत वर्ष इस योजना के तहत प्रदेश भर में लगभग 3 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई थी। वहीं मंडी जिला में अब तक 21.74 लाख रुपये का उपदान लाभार्थियों को मिल चुका है।
मांडल गांव के मुकेश ठाकुर ने बताया कि उन्होंने इस योजना के माध्यम से लगभग 15.5 लाख रुपये की ई-टैक्सी खरीदी, जिस पर उन्हें साढ़े सात लाख रुपये की सब्सिडी मिली। उनकी टैक्सी वर्तमान में जल शक्ति विभाग से संबद्ध है, जिससे उन्हें हर महीने लगभग 50 हजार रुपये की आय हो रही है।
इसी तरह भूर गांव के सुभाष चंद्र ने भी इस योजना से लाभ उठाया। पहले वे बेरोजगार थे, लेकिन अब उनकी ई-टैक्सी जल शक्ति विभाग पधर उपमंडल में कार्यरत है और वे हर महीने 50 हजार रुपये तक कमा रहे हैं। दोनों लाभार्थियों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना बेरोजगार युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन गई है।
राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना न केवल युवाओं को स्थायी आय का साधन प्रदान कर रही है, बल्कि ग्रीन और स्वच्छ हिमाचल के लक्ष्य को भी मजबूत कर रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से प्रदूषण घटाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में यह योजना एक मील का पत्थर साबित हो रही है।





