चिट्टे का कहर: ओवरडोज़ से कई युवाओं की मौत, पूरे परिवार नशे की चपेट में
हिमाचल प्रदेश में चिट्टे का नशा कई परिवारों को बर्बादी के कगार पर पहुंचा चुका है। लगातार बढ़ रहे मामलों में कई युवाओं की ओवरडोज़ से मौत हो चुकी है। इसी माह शिमला में सामने आए एक मामले ने पुलिस तक को हिला दिया, जहां नशा तस्करी में पकड़े गए एक आरोपी ने खुलासा किया कि उसके परिवार की तीन पीढ़ियाँ—दादा, बेटा और पोती—चिट्टे की लत में फंस चुकी हैं।
शिमला के संजौली क्षेत्र में हाल ही में गिरफ्तार दो युवकों से पूछताछ में पता चला कि उनमें से एक का भाई पहले ही चिट्टे की ओवरडोज़ के कारण मौत का शिकार हो चुका है, जबकि वह खुद भी लंबे समय से नशे का आदी है। सफेद पाउडर जैसा दिखने वाला यह ज़हर न केवल युवाओं की जान ले रहा है, बल्कि नशे की पूर्ति के लिए उन्हें अपराध की राह पर भी धकेल रहा है। कई युवा अपने घरों में चोरी करने से नहीं हिचकते और यहां तक कि मां के गहने बेचकर नशा खरीदते पकड़ जाते हैं।
पुलिस दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों से होने वाली चिट्टे की तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार अभियान चला रही है, लेकिन इसके बावजूद नशे का प्रसार चिंता का विषय बना हुआ है। चिंताजनक बात यह है कि अब केवल युवा ही नहीं, बल्कि बुजुर्ग भी इस नशे की चपेट में आ रहे हैं। हाल ही में 75 वर्षीय बुजुर्ग और कुछ समय पहले कोटखाई क्षेत्र में 56 वर्षीय व्यक्ति को चिट्टा तस्करी में गिरफ्तार किया गया।
जिला शिमला में इस साल अभी तक 250 एनडीपीएस केस दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 550 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें 20 महिलाएँ भी शामिल हैं। बढ़ते आंकड़े प्रदेश में नशे की भयावह स्थिति की ओर इशारा करते हैं।





